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Tuesday, July 24, 2012

UPTGT-PGT- चयन बोर्ड के विवाद से अधर में लटकीं तीन हजार नियुक्तियां



UPTGT-PGT- चयन बोर्ड के विवाद से अधर में लटकीं तीन हजार नियुक्तियां
लखनऊ : प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में प्रभारी जरूर नियुक्त कर दिया है लेकिन इसके दामन पर लगे दागों को धो पाना आसान नहीं है। अध्यक्ष और सदस्यों के बीच मुकदमेबाजी, चयन में धांधली के आरोपों और सदस्यों की कमी के चलते लगभग तीन हजार शिक्षकों और प्रधानाचार्यो की नियुक्ति अधर में लटकी हुई है। डेढ़ हजार से अधिक शिक्षकों के प्लेसमेंट भी लटके बताए जाते हैं। ऐसे में नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाने के बावजूद स्कूलों को नये अध्यापकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
तीन हजार पद, सदस्य तीन : चयन प्रक्रिया शुरू होने में सदस्यों की कमी भी एक बड़ा रोड़ा है। बोर्ड में अध्यक्ष को मिलाकर 11 सदस्य होते हैं। वर्तमान में सिर्फ चार ही सदस्य रह गए हैं। इसमें भी एक के कामकाज पर शासन ने रोक लगा दी है। सपा सरकार के गठन के बाद उम्मीद थी कि नये सदस्यों की नियुक्ति हो जाएगी लेकिन अभी यह मामला लटका हुआ है। ऐसे में सिर्फ तीन सदस्यों के सहारे बोर्ड का सुचारु ढंग से काम कर पाना मुश्किल है। सदस्य ही अध्यक्ष के साथ मिलकर नीतिगत फैसले लेते हैं। चयनप्रक्रिया में भी उनकी अहम भागीदारी है।

Thursday, July 12, 2012

UPTGT,PGT-अधर में लटकी टीजीटी पीजीटी चयन

UPTGT,PGT-अधर में लटकी टीजीटी पीजीटी चयन
वरिष्ठ संवाददाता, इलाहाबाद : प्रशिक्षित स्नातक, प्रवक्ता और संस्था प्रधान के पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया अधर में लटक गई है। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने अगस्त में प्रशिक्षित स्नातक और प्रवक्ता के पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित कराने की बात कही थी, पर हाईकोर्ट द्वारा बोर्ड अध्यक्ष के अधिकार सीज किए जाने के बाद यह संभव नहीं लग रहा है। सदस्यों के भी कई पद खाली हैं। सचिव का भी स्थानांतरण हो गया है, लिहाजा बोर्ड का काम-काज पूरी तरह से ठप है।

माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) व प्रवक्ता (पीजीटी) के पदों पर आवेदन मांगे थे। इन पदों पर पांच लाख से भी अधिक आवेदन पत्र आए हैं। चयन बोर्ड ने आवेदन पत्रों की छंटाई और डाटा फीडिंग का काम शुरू कर दिया था। बीच में आचार संहिता लगने के कारण चयन प्रक्रिया पर रोक लग गई। अब चयन प्रक्रिया पर रोक हटने और आचार संहिता भी खत्म होने के बावजूद चयन प्रक्रिया रुकी हुई है। हाईकोर्ट ने चयन बोर्ड के अध्यक्ष पर नियुक्तियों में गड़बड़ी का आरोप लगने के बाद हाईकोर्ट ने जून में अध्यक्ष के अधिकार तब तक सीज कर दिए हैं जब तक कि वे दोषमुक्त न हो जाएं। तीन महीने के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपनी है। अध्यक्ष और 10 सदस्यों को मिलाकर बोर्ड बनता है। अध्यक्ष के अधिकार सीज हैं और छह सदस्यों के पद खली हैं। एक सदस्य के चयन प्रक्रिया में भाग लेने पर रोक है। ऐसे में चयन प्रक्रिया तीन माह बाद ही शुरू होने के आसार दिख रहे हैं। संस्था प्रधानों के साक्षात्कार भी जून में रखे गए थे। अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलावा पत्र भी भेज दिया गया था। बाद में साक्षात्कार स्थगित कर दिया गया।
news source-dainik jagran 12/07/2012