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Monday, July 30, 2012

PBTET-शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के कई केंद्रों पर हंगामा


PBTET-शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के कई केंद्रों पर हंगामा- 50 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसकी परीक्षा के लिए कुल 7 लाख 10 हजार परीक्षार्थियों ने नामांकन किया था। 

कोलकाता :स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) की परीक्षा में आज कोलकाता हावड़ा सहित जिलों कई केन्द्रों पर प्रश्न पत्र पहुंचने में विलम्ब को लेकर हंगामा हुआ और अनेक छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया। उत्तरी अंचल में कई परीक्षा केंद्रों पर हुई असुविधाओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल सेवा आयोग की ओर से बांग्ला पास एवं उर्दू पास की परीक्षा फिर से ली जाएगी। पूर्वी अंचल को लेकर विचार विमर्श के बाद कोई सूचना दी जाएगी। पूर्वी एवं दक्षिण पूर्वी अंचल में परीक्षा सुचारु रुप से हुई। एसएससी के चेयरमैन चितरंजन मंडल ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एसएससी की परीक्षा में किया गया हंगामा एक रची-रचाई साजिश थी। इसकी जांच के लिए कमीशन की ओर से एक कमेटी का भी गठन किया जाएगा। जिन परीक्षार्थियों ने परीक्षा का बायकाट किया है उसकी जिम्मेवारी न तो कमीशन लेगा और ना ही प्रशासन। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों ने टेट की परीक्षा दी है सिर्फ उनकी ही दुबारा परीक्षा ली जाएगी

Wednesday, July 25, 2012

पीएचडी संयुक्त पात्रता परीक्षा-2012 -छलावा न साबित हो जाए पीएचडी पात्रता परीक्षा


 पीएचडी संयुक्त पात्रता परीक्षा-2012 -छलावा न साबित हो जाए पीएचडी पात्रता परीक्षा
इलाहाबाद : डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पीएचडी संयुक्त पात्रता परीक्षा-2012 छलावा साबित हो सकती है। इस परीक्षा को पास करने वाले हजारों विद्यार्थियों के पीएचडी करने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। राज्य के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की रिक्त सीटों की संख्या और गाइड की उपलब्धता पीएचडी की राह में सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है।
शोध में प्रवेश के लिए प्रदेश में पहली बार संयुक्त पात्रता परीक्षा आयोजित की गई। एक जून को 37 विषयों में 93785 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी। इसमें से 31285 को पीएचडी के लिए पात्र घोषित किया गया है। जबकि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में पीएचडी की रिक्त सीटों की संख्या हजार भी नहीं है। इसके अलावा कई विषयों में गाइड उपलब्ध नहीं होने से भी परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को मुश्किल उठानी पड़ सकती है। पात्रता परीक्षा का प्रमाण पत्र दो वर्षो तक वैध माना जाएगा।
नहीं है स्लेट का दर्जा

Tuesday, July 24, 2012

UPTGT-PGT- चयन बोर्ड के विवाद से अधर में लटकीं तीन हजार नियुक्तियां



UPTGT-PGT- चयन बोर्ड के विवाद से अधर में लटकीं तीन हजार नियुक्तियां
लखनऊ : प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में प्रभारी जरूर नियुक्त कर दिया है लेकिन इसके दामन पर लगे दागों को धो पाना आसान नहीं है। अध्यक्ष और सदस्यों के बीच मुकदमेबाजी, चयन में धांधली के आरोपों और सदस्यों की कमी के चलते लगभग तीन हजार शिक्षकों और प्रधानाचार्यो की नियुक्ति अधर में लटकी हुई है। डेढ़ हजार से अधिक शिक्षकों के प्लेसमेंट भी लटके बताए जाते हैं। ऐसे में नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाने के बावजूद स्कूलों को नये अध्यापकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
तीन हजार पद, सदस्य तीन : चयन प्रक्रिया शुरू होने में सदस्यों की कमी भी एक बड़ा रोड़ा है। बोर्ड में अध्यक्ष को मिलाकर 11 सदस्य होते हैं। वर्तमान में सिर्फ चार ही सदस्य रह गए हैं। इसमें भी एक के कामकाज पर शासन ने रोक लगा दी है। सपा सरकार के गठन के बाद उम्मीद थी कि नये सदस्यों की नियुक्ति हो जाएगी लेकिन अभी यह मामला लटका हुआ है। ऐसे में सिर्फ तीन सदस्यों के सहारे बोर्ड का सुचारु ढंग से काम कर पाना मुश्किल है। सदस्य ही अध्यक्ष के साथ मिलकर नीतिगत फैसले लेते हैं। चयनप्रक्रिया में भी उनकी अहम भागीदारी है।

Wednesday, June 27, 2012

bihar-3493 सहायक प्रोफेसरों के पदों पर नियुक्ति की मंजूरी

3493 सहायक प्रोफेसरों के पदों पर नियुक्ति की मंजूरी
पटना,  बिहार राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उसके अधिनस्थ अंगीभूत महाविद्यालयों में रिक्त 3493 सहायक प्रोफेसरों के पदों पर नियुक्ति किये जाने को सोमवार को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी।


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को संपन्न राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए मंत्रिमंडल सचिवालय समन्वय विभाग के प्रधानसचिव रविकांत ने बताया कि मंत्रिमंडल ने प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उसके अधीनस्थ अंगीभूत महाविद्यालयों में अध्ययरत छात्रों की संख्या और कोर्स आदि के आधार पर उन्हें युक्तिसंगत बनाए जाने को अपनी अपनी मंजूरी प्रदान कर दी।

उन्होंने कहा कि इस आधार पर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उसके अधीनस्थ अंगीभूत महाविद्यालयों में कुल स्वीकृत पदों की संख्या अब 10008 होगी और उसमें से रिक्त 3493 सहायक प्रोफेसरों के पदों पर नियुक्ति का मार्ग अब प्रशस्त हो गया है।

Saturday, June 23, 2012

UPTGT,UPPGT-मिलेगी ओएमआर शीट की प्रति, जारी होगी मेरिट

मिलेगी ओएमआर शीट की प्रति, जारी होगी मेरिट
इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने शुक्रवार को हुई बैठक में कई अहम फैसले लिए। आगामी परीक्षाओं में चयन बोर्ड ने ओएमआर शीट की एक प्रति परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को देने, परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी वेबसाइट पर जारी करने का निर्णय लिया गया है।

बैठक के बाद माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. आरपी वर्मा ने बताया कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से सही उत्तर जारी करने के बाद अभ्यर्थियों को 15 दिन का समय दिया जाएगा। 15 दिनों में अभ्यर्थियों द्वारा की गई आपत्तियों का विषय विशेषज्ञों द्वारा निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके अलावा लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के बाद चयनित व असफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट भी जारी की जाएगी। चयन बोर्ड ने इसके अलावा प्रवेश पत्र भेजने की प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब प्रवेश पत्र ऑनलाइन ही मिलेगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र बोर्ड की वेबसाइट से डाउनलोड करना होगा। किसी भी अभ्यर्थी को डुप्लीकेट प्रवेश पत्र नहीं दिया जाएगा। ज्ञातव्य है कि प्रतियोगी परीक्षार्थी चयन बोर्ड से मेरिट लिस्ट वेबसाइट पर जारी करने की लंबे समय से मांग करते रहे हैं। इसके अलावा परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों के सही उत्तर जारी करने की भी मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन हुआ है। अभी तक सूचना के अधिकार के तहत बोर्ड द्वारा तय किए गए सही उत्तर मिलते थे। इस नई व्यवस्था से अभ्यर्थियों को सहूलियत मिलेगी।source-dainik jagran 23/6/12

Wednesday, May 30, 2012

UP-मुंसिफ मजिस्ट्रेट परीक्षा-एक दो नहीं, 20 उत्तरों पर उठे सवाल



एक दो नहीं, 20 उत्तरों पर उठे सवाल
-मुंसिफ मजिस्ट्रेट परीक्षा-

-अभ्यर्थियों ने आयोग से संशोधित आंसर की देने की मांग की

वरिष्ठ संवाददाता, इलाहाबाद : लोक सेवा आयोग गन्ने को भारतीय मूल की फसल नहीं मानता। लोक सेवा आयोग के अनुसार मक्का भारतीय मूल की फसल है, जबकि अभ्यर्थियों को इस पर आपत्ति है। ऐसे ही आयोग के अनुसार सबसे बड़ा चांदी उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश है, जबकि अभ्यर्थी राजस्थान को मान रहे हैं। विडंबना ही है कि जिस परीक्षा का उच्च न्यायालय पर्यवेक्षण करता है उस परीक्षा के एक दो नहीं 20 प्रश्नों के उत्तरों पर अभ्यर्थियों ने आपत्तियां उठा दी हैं। इतने बड़े पैमाने पर आपत्तियां आने पर प्रतियोगी छात्र भी हतप्रभ हैं।

लोक सेवा आयोग ने 13 मई को मुंसिफ मजिस्ट्रेट के 76 पदों के लिए प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी। आयोग ने अभी हाल ही में इस परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों पर आपत्तियां मांगी हैं। अभ्यर्थियों ने आयोग द्वारा बताए गए 20 प्रश्नों के विकल्पों पर आपत्ति दर्ज कराई है। मंगलवार को अभ्यर्थियों ने आयोग को लिखित रूप में प्रत्यावेदन दिया है। सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र में आयोग ने संगीत नाटक अकादमी की स्थापना का वर्ष 1953 को माना है, जबकि अभ्यर्थी 1952 को सही मान रहे हैं। ऐसे ही आयोग ने रायल कमीशन ऑन द पब्लिक सर्विसेज इंडिया 1912 के सदस्य गोपाल कृष्ण गोखले को मान रहा है जबकि अभ्यर्थी बालगंगाधर तिलक को मान रहे हैं।

भारत सरकार को सबसे ज्यादा आय निगमकर से होती है जबकि आयोग संघीय उत्पाद से मान रहा है। निर्भय की अधिकतम गति 0.65 है, जबकि आयोग इसे गलत बता रहा है। सबसे अधिक यूरेनियम भंडर आस्ट्रेलिया में है, जबकि आयोग इसे कनाडा में मान रहा है। ऐसे ही आयोग ने ए सीरीज की बुकलेट में प्रश्न संख्या 103 का सही उत्तर डी है, जबकि आयोग सी बता रहा है। 127 प्रश्न का सही उत्तर सी है, जबकि आयोग डी मान रहा है। प्रश्न संख्या पांच का सही उत्तर डी है, जबकि आयोग सी मान रहा है। ऐसे ही विधि के पेपर में ए सीरीज की बुकलेट में प्रश्न संख्या 10 का सही उत्तर अभ्यर्थी डी को मान रहे हैं। प्रश्न संख्या 13 का सही उत्तर ए है, जबकि आयोग सी को मान रहा है।

प्रश्न संख्या 50 में सही ए है, जबकि आयोग डी को सही बता रहा है। प्रश्न 52 का सही ए है आयोग डी को सही मान रहा है। प्रश्न 66 का सही डी, जबकि आयोग सी को मान रहा है। प्रश्न 133 का सही डी, जबकि आयोग सी को सही बता रहा है। प्रश्न संख्या 138 का सही उत्तर सी है, जबकि आयोग बी को, प्रश्न संख्या 150 का सही उत्तर डी है जबकि आयोग सी को मान रहा है। अभ्यर्थियों ने आयोग द्वारा बताए गए इन विकल्पों पर प्रत्यावेदन देकर आपत्ति दर्ज कराई है। प्रतियोगी छात्र अनुराग त्रिपाठी, अजय त्रिपाठी, संदीप चौबे, संतोष पांडेय व संजीव मिश्रा आदि ने आयोग से संशोधित आंसर की जारी करने की मांग की है।

up-टीचरों को मिल सकता है मानदेय

टीचरों को मिल सकता है मानदेय
लखनऊ, जाब्यू : वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर। मंगलवार को विधानसभा में भाजपा के सुरेश खन्ना के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से बताया गया कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को जीविकोपार्जन के लिए मासिक मानदेय दिए जाने का प्रकरण विचाराधीन है। सरकार ने माना कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कोई सेवा नियमावली नहीं है। शिक्षामित्रों का समायोजन होगा : सुरेश खन्ना के ही एक अन्य सवाल के जवाब में बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने बताया कि शिक्षा मित्रों का समायोजन सरकार की प्राथमिकता में है। चरणबद्ध तरीके से 2014 तक शतप्रतिशत समायोजन की योजना है। करीब 40 हजार शिक्षा मित्र स्नातक डिग्रीधारी होने के बाद समायोजित कर लिए जाएंगे। उन्होंने मानदेय बढ़ाने या डिग्री लेने के लिए विशेष अनुमति देने से इनकार किया।
source-dainik jagran 30/512

Wednesday, May 23, 2012

दस हजार वित्तविहीन शिक्षकों को बंधी मानदेय की आस

दस हजार वित्तविहीन शिक्षकों को बंधी मानदेय की आस
-शासन ने मांगी वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की सूची

वरिष्ठ संवाददाता, इलाहाबाद : दुर्दशा के शिकार वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के मानदेय तय होने की संभावनाओं को और बल मिला है। शासन ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से वित्तविहीन विद्यालयों और उनमें पढ़ा रहे शिक्षकों की सूची मांगी है।

सत्ता में आने से पूर्व प्रदेश की सपा सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वित्तविहीन विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों का न्यूनतम मानदेय तय करने का आश्वासन दिया था। अपनी घोषणा पर अमल की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सपा सरकार ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से वित्तविहीन विद्यालयों और शिक्षकों की सूची मांगी है।

इलाहाबाद के जिला विद्यालय निरीक्षक महेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इलाहाबाद जनपद में कुल 10,680 शिक्षक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं।

जिले में बालिकाओं के 150 और बालकों के 512 वित्तविहीन विद्यालय हैं। इसके अतिरिक्त बालकों के 59 विद्यालयों को इंटर में कुछ विषयों की वित्तविहीन मान्यता है।

बालिकाओं के विद्यालय में 2157 शिक्षक तैनात हैं, जबकि बालकों के विद्यालयों में 8044 अध्यापक कार्यरत हैं। बालकों के इंटरमीडिएट की वित्तविहीन मान्यता वाले 59 विद्यालयों में 479 अध्यापक अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
 source-dainik jagran 23/5/12

Saturday, May 19, 2012

प्रदेश में खुलेंगे 38 बीआइटीई

प्रदेश में खुलेंगे 38 बीआइटीई
राजीव दीक्षित लखनऊ, 18 मई : प्राथमिक व उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति के काबिल शिक्षक तैयार करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों में ब्लॉक इन्स्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन (बीआइटीई) खोलने की मंशा जतायी है। केंद्र सरकार के आर्थिक सहयोग से स्थापित किये जाने वाले बीआइटीई में प्रशिक्षु शिक्षकों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) की तर्ज पर सेवा पूर्व प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके तहत उप्र के 38 अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति बहुल जिलों में बीआइटीई स्थापित किए जाएंगे। इस संबंध में शासन ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद से विस्तृत प्रस्ताव मांगा है। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय का मानना है कि बीआइटीई की स्थापना से अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति बहुल इलाकों में शिक्षकों के प्रशिक्षण की बेहतरीन सुविधाएं विकसित होंगी। साथ ही अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति वर्गो के मेधावी शिक्षक के पेशे की ओर आकर्षित होंगे। केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने जनगणना 2001 के आधार पर देश में 90 अल्पसंख्यक बहुल जिले चिह्नि्त किए थे। अल्पसंख्यक बहुल जिलों के अलावा जनगणना 2001 के आधार पर देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे 106 जिले चिह्नि्त किए गए हैं जिनमें अनुसूचित जाति की संख्या कुल आबादी की 25 प्रतिशत से अधिक और अनुसूचित जनजाति की 50 फीसद से अधिक है। एचआरडी मंत्रालय ने इन 196 अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति/जनजाति बहुल जिलों में से प्रत्येक में एक बीआइटीई की स्थापना की मंशा जतायी है। इसके तहत उप्र के अल्पसंख्यक बहुल 21 और अनुसूचित जाति बहुल 17 जिलों में बीआइटीई की स्थापना का इरादा जाहिर किया गया है। बीआइटीई की स्थापना इन जिलों के उन ब्लॉक में की जाएगी जहां पहले से डायट संचालित न हों। एचआरडी मंत्रालय ने बीआइटीई की स्थापना के लिए कई विकल्प सुझाए हैं। एक विकल्प यह है कि जिले में नया बीआइटीई स्थापित किया जाए जिसमें 50 प्रशिक्षुओं के लिए हॉस्टल की भी व्यवस्था होगी। बीआइटीई के लिए जमीन राज्य सरकार मुहैया कराएगी जबकि इसकी स्थापना पर होने वाले सिविल कार्यो के लिए केंद्रीय सहायता दी जाएगी। उपकरणों के लिए 20 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता मिलेगी। बीआइटीई में सृजित होने वाले पदों के वेतन के लिए भी आवर्तक केंद्रीय सहायता दी जाएगी। दूसरा विकल्प यह है कि ऐसे जिलों में डायट के अलावा संचालित किसी शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान को बीआइटीई के रूप में उच्चीकृत कर दिया जाए। तीसरा विकल्प यह है कि इन जिलों में संचालित अच्छे आरंभिक शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानों से संपर्क कर उनमें अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति के योग्य प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिलाने की संभावनाएं तलाशी जाएं। इन प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण का खर्च सरकार वहन करेगी।source-dainik jagran 19/5/12

फर्जीवाड़ा कर नौकरी हासिल करने वालों पर गाज गिरनी तय



उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेजों में फर्जीवाड़ा कर नौकरी हासिल करने वालों पर गाज गिरनी तय है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को शिकायत मिली है शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मियों को सहायता प्राप्त हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में अवैध तरीके से नियुक्त दी गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए अपर शिक्षा निदेशक डॉ. आईपी शर्मा ने सभी डीआईएसओ को 25 मई तक स्कूल और कॉलेजवार कार्यरत कर्मियों का ब्योरा निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही जारी निर्देशों में कहा गया है कि डीआईएसओ से कहा गया है कि सृजित पदों के तुलना में विभागीय नियमानुसार नियुक्त एवं कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों का ब्योरा स्कूलवार भेजें। निदेशक ने अतिरिक्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान कराने वाले स्कूल और कॉलेज प्रबंधकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

उनका कहना है कि ऐसे प्रबंधन तंत्र के विरुद्ध उत्तर प्रदेश हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट कॉलेज (अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों का वेतन भुगतान) वितरण अधिनियम 1971 के तहत प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक एवं प्रबंधक के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज कराई जाए।

इसके अलावा सभी डीआईएसओ से कहा गया है कि वे सुनिश्चित कर लें कि शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वेतन भुगतान सृजित और स्वीकृत पदों के सापेक्ष किया जा रहा है। गड़बड़ियां सामने आने पर संबंधित जिले के डीआईएसओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह जानकारी मांगी गई है
- कितने स्कूल और कॉलेजों के कर्मियों का ब्योरा हार्ड और सॉफ्ट कॉपी में डीआईएसओ कार्यालय में उपलब्ध है।
- स्कूल और कॉलेजों से प्राप्त ब्योरा के आधार पर सत्यापन कराकर वेतन का भुगतान किया जा रहा है या नहीं।
- जिन संस्थाओं ने निर्धारित सूचना समय से उपलब्ध नहीं कराई। उन स्कूल और कॉलेजों का वेतन भुगतान रोका गया या नहीं।
- जिन स्कूल और कॉलेजों में वेतन भुगतान किए जा रहे हैं, क्या वह सृजित पदों के सापेक्ष विभागीय नियमानुसार नियुक्त एवं नियमित रूप से कार्यरत शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारी हैं।
- शासन द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर अंकित सूचनाओं एवं साक्ष्यों का सत्यापन कर पंजिका के रूप में संकलित कर डीआईएसओ कार्यालय में सुरक्षित कर ली गई है। यदि नहीं है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
- अनियमित रूप से नियुक्त ऐसे कर्मियों की सूचना भेजी गई या नहीं जिन्हें वेतन भुगतान किया जा रहा है। जिन संस्थाओं में हाईकोर्ट के आदेशों से वेतन भुगतान किया जा रहा है उनकी सूचना भी भेजी जाए।
source-amar ujala 19/5/12

Friday, May 18, 2012

पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन नर्सरी एजुकेशन उत्तीर्ण अभ्यार्थियों का प्रतिनिधिमंडल बेसिक शिक्षा मंत्री से मिलकर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हेतु पत्रक दिया।



बलिया : वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्व विद्यालय जौनपुर से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन नर्सरी एजुकेशन उत्तीर्ण अभ्यार्थियों का प्रतिनिधिमंडल बेसिक शिक्षा मंत्री से मिलकर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हेतु पत्रक दिया। डिप्लोमा धारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया कि मुअक्किल एवं डिप्लोमा इन उर्दू टीचर ट्रेनिंग की भांति पोस्ट डिप्लोमा इन नर्सरी एजुकेशन के उत्तीर्ण अभ्यर्थी 2604 की भी नियुक्ति की जाय। इसमें महिलाओं की संख्या 50 प्रतिशत है। मंत्री ने डिप्लोमाधारियों की समस्याओं को सुना व अविलम्ब निस्तारण हेतु आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में मु.कलीमुल हक, अखिलेश यादव, चुन्नू लाल चौरसिया, धनंजय उपाध्याय, देवमुनी यादव, कृष्ण मुरारी, जय राम वर्मा, विनोद यादव, दिलीप तिवारी, लल्लन चौधरी, कंचन पाण्डेय, ओम प्रकाश वर्मा आदि शामिल रहे। source=dainik jagran 18/5/12

चयन बोर्ड में फर्जी शिक्षकों की जांच ठप!

चयन बोर्ड में फर्जी शिक्षकों की जांच ठप!
इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा फर्जी शिक्षकों की जांच खटाई में पड़ती जा रही है। स्थिति यह है कि चयन बोर्ड के अधिकारी और न ही डीआइओएस इस काम में रुचि ले रहे हैं। यही कारण है कि अभी भी कई जिलों में चयन बोर्ड द्वारा भेजे गए पैनल का सत्यापन नहीं हो सका है। अब तक की जांच में 60 फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। प्रदेश में कई फर्जी शिक्षकों के पकड़े जाने के बाद माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने करीब नौ माह पहले पैनल सत्यापन की जांच कराने का फैसला किया था। जांच के लिए एक चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी। जांच समिति को 10 वर्षो में चयनित शिक्षकों के पैनल का सत्यापन करना था। पैनल सत्यापन का काम बोर्ड ने 26 सितंबर से शुरू कर दिया। इसमें सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को 10 वर्षो में भेजे गए पैनल के साथ बोर्ड दफ्तर में आना था। कहा गया कि पैनल संबंधित जिलों के जिलाविद्यालय निरीक्षक खुद लेकर आएंगे। साथ में एक वरिष्ठ कर्मचारी भी होगा। विडंबना यह है कि लाख प्रयास के बावजूद भी अभी तक आठ जिलों का पैनल सत्यापित नहीं कराया जा सका है। डीआइओएस तारीख पर तारीख दे रहे हैं और चयन बोर्ड असहाय सा हो गया है। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के उप सचिव नवल किशोर ने बताया कि अभी भी आठ जिलों के पैनल का सत्यापन नहीं कराया जा सका है। source-dainik jagran 18/5/12

तो दोगुनी होती आवेदकों की संख्या

तो दोगुनी होती आवेदकों की संख्या
इलाहाबाद : शिक्षक भर्ती मामले में विवि प्रशासन ने उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद भले ही अपनी रही सही इज्जत बचाने के लिए अपने विज्ञापन में संशोधन का प्रस्ताव पारित करवा लिया हो, लेकिन एक यक्ष प्रश्न तो अभी भी बरकरार है कि ऐसे विज्ञापन के चलते जो गरीब छात्र दो हजार रुपये खर्च करने की हिम्मत नहीं जुटा सके, उनके लिए एक स्वर्णिम अवसर की भरपाई कौन करेगा। उल्लेखनीय है कि शिक्षक भर्ती को भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ाने के लिए ही ऐसा विज्ञापन बनाया गया था कि वह इस विवि के विधि संकाय के शिक्षकों की भी समझ से परे था। विवि प्रशासन को पूरा विश्वास था कि 2009 की 31 दिसंबर से पूर्व पीएचडी करने वालों को, जिन्हें नेट से छूट यूजीसी ने दी थी, को फार्म भरने देना उनकी दया पर निर्भर है। फार्म जमा होने की अंतिम तिथि के कुछ दिन बाद रमेश यादव की दायर याचिका पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि देश में उच्च शिक्षा के संबंध में गाइड लाइन देने वाली सबसे बड़ी संस्था यूजीसी है न कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय। अब जिन छात्रों ने दो हजार का जुआ खेला वे तो अब सुरक्षित हैं, लेकिन जो गरीब छात्र दो हजार का फार्म नहीं भर सके, वे अब सदमे में हैं। सचाई तो यह है कि शिक्षक भर्ती के 17000 फार्म में ऐसे अभ्यर्थी 5000 के करीब हैं। उच्च न्यायालय का निर्णय पहले आया होता तो यह संख्या कम से कम दस हजार होती। बुधवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में विवि प्रशासन ने विज्ञापन की भाषा को सीधा करने संबंधी प्रस्ताव पास करा लिया है। अब ऐसे छात्र जो केवल उक्त तिथि से पहले के पीएचडी हैं, वे अपने गाइड और रजिस्ट्रार का एक पत्र लगाकर इस भर्ती प्रक्रिया में वैध रूप से शामिल हो सकते हैं, उनकी छंटनी तो कम से कम नहीं की जा सकती। पर जो गरीब पीएचडी धारक छात्र इसमें भाग लेने से वंचित रह गए उनके संबंध में डॉ. रमेश यादव कहते हैं कि कई गरीब छात्र विवि की मनमानी का शिकार हो गए। अब इनके सामने न्यायालय ही एक चारा बचता है जहां ये विज्ञापन की भाषा को चुनौती देकर पुनर्विज्ञापन की मांग कर सकते हैं। source-dainik jagran 18/5/12






Wednesday, May 16, 2012

बीटीसी अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता साफ



उत्तर प्रदेश के 72825 टीईटी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के सहायक अध्यापक पद पर चयन और नियुक्ति के मामले में बीटीसी और विशिष्ट बीटीसी उर्दू अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता साफ हो गया है। बेसिक शिक्षा सचिव द्वारा अदालत में दिए हलफनामे में कहा गया है कि 1 दिसंबर 2011 को जारी संशोधित विज्ञापन को रद करके बीटीसी अभ्यर्थियों के अलग चयन के लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। शपथपत्र में चयन प्रक्रिया का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है।

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा कि सचिव के शपथपत्र में अधूरी सूचनाएं दी गई हैं। इसमें यह नहीं बताया गया है कि विज्ञापन किस तिथि को जारी होगा। कोर्ट ने 25 मई तक विज्ञापन जारी की तिथि बताने का निर्देश दिया है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सचिव बेसिक शिक्षा को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया था कि बीटीसी अभ्यर्थियों को छह माह के प्रशिक्षण हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा। सचिव बेसिक शिक्षा की ओर से कहा गया है कि बीटीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति के नए सिरे से विज्ञापन जारी करने के लिए सभी जिलों के जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) को निर्देश जारी किए गए हैं। विज्ञापन जारी होने के बाद उनकी नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में वर्तमान में करीब 30 हजार बीटीसी अभ्यर्थी हैं। यदि इनकी नियुक्ति के लिए पहले विज्ञापन जारी कर दिया जाता है तो 72825 पदों के सापेक्ष सभी टीईटी चयनित बीटीसी अभ्यर्थियों की नियुक्ति होने की संभावना है क्योंकि इस श्रेणी की मेरिट बनाने की भी आवश्यकता नहीं होगी।
source-amar ujala 16/5/12

दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने यहां चार वर्षीय कोर्स बैचलर ऑफ एलिमेंटरी एजुकेशन तैयार किया है।

प्राइमरी और सीनियर सेकंडरी स्कूल में शिक्षक बनने के लिए अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग और कोर्स की जरूरत होती है। प्राइमरी शिक्षक बनने के लिए कहीं दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स है तो कहीं एलिमेंटरी टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स। इन सबसे हट कर दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने यहां चार वर्षीय कोर्स बैचलर ऑफ एलिमेंटरी एजुकेशन तैयार किया है। इस कोर्स में छात्रों को बीए यानी स्नातक की डिग्री के साथ-साथ टीचर्स ट्रेनिंग की डिग्री भी दी जाती है। इसे करने के बाद आप देश-विदेश के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी स्कूल में आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के योग्य हो जाते हैं। खास बात यह कि बीएलएड का कोर्स दिल्ली विश्वविद्यालय में सिर्फ लड़कियों के लिए चलाया गया है। आठ कॉलेजों में लड़कियों को दाखिले का मौका मिलता है।

कोर्स में प्रवेश के लिए 12वीं पास छात्राओं को प्रवेश परीक्षा देनी होती है। प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए बारहवीं में 50 फीसदी अंक होना अनिवार्य है। आवेदन फॉर्म खरीदने और भरने का सिलसिला 22 मई से 7 जून तक चलेगा। 24 जून को प्रवेश परीक्षा है। इसके बाद सफल छात्राओं की अंतिम लिस्ट निकाली जाएगी। साक्षात्कार की प्रक्रिया अब खत्म कर दी गई है। करीब दो घंटे के टेस्ट में लड़कियों से रीजनिंग, गणित, अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। परीक्षा का लेवल दसवीं स्तर का होता है, इसलिए छात्राओं को एनसीईआरटी पर फोकस करना चाहिए। परीक्षा की रूपरेखा प्रॉस्पेक्टस में दे दी गई है। फॉर्म उत्तरी परिसर स्थित सेंट्रल इंस्टीटय़ूट ऑफ एजुकेशन से मिलेगा।

Friday, May 11, 2012

रद नहीं होगी प्रिंसिपलों की भर्ती

 रद नहीं होगी प्रिंसिपलों की भर्ती नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश में नौकरी गंवाने की कगार पर खड़े डिग्री कॉलेज के करीब 156 प्रिंसिपलों को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्नातक व परास्नातक कॉलेजों में प्रिंसिपलों की भर्ती रद्द करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। 
source-dainik jagran 11/5/12

Wednesday, May 9, 2012

स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने मांगा विनियमितीकरण

स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने मांगा विनियमितीकरण
लखनऊ : राज्य विश्वविद्यालय/ अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से विनियमितीकरण की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बलजीत श्रीवास्तव का कहना है कि एक ही विवि या महाविद्यालय में स्ववित्तपोषित शिक्षक दोयम दर्जे से बदतर की स्थिति में नौकरी कर रहे हैं। प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या हजारों में हैं, जो सपा सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं। संघ की ओर से अमीनाबाद स्थित गंगा प्रसाद लाइब्रेरी में सपा मंत्रियों के अभिनन्दन समारोह में प्रदेश अध्यक्ष ने शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संघ के प्रदेश महामंत्री डॉ. ओमकार नाथ पांडेय ने बताया कि यूजीसी 80 फीसद वेतन देने को तैयार है, लिहाजा प्रदेश सरकार पर ज्यादा भार भी नहीं पड़ेगा। प्रदेश में लगभग 1.5 अरब रुपये अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों से फीस के रूप में आते हैं। शिक्षकों को विनियमित कर दिया जाता है तो 70-75 करोड़ रुपये का ही खर्च आएगा। समारोह में मुख्य अतिथि मंत्री स्वतंत्र प्रभार अरविंद सिंह गोप और विशिष्ट अतिथि मंत्री प्रोटोकॉल प्रो. अभिषेक मिश्र का अभिनन्दन किया गया। गोप और प्रो. मिश्र की ने शिक्षकों को आश्वासन दिया है कि विनियमितीकरण की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू की जाएगी। सपा, प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. समीर तिवारी ने इस संदर्भ में शिक्षकों के एक प्रतिनिधि मंडल की वार्ता मुख्यमंत्री से कराने की बात कही है। कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. कीर्ति प्रकाश तिवारी, डॉ. संजय मिश्र व अन्य उपस्थित रहे। विश्र्वपटल पर भारतीय अस्मिता को दिया विस्तार : विश्र्व पटल पर भारतीय साहित्य को जीवंत करने वाले गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की याद में राज्य ललित कला अकादमी के राय कृष्ण दास सभागार में कार्यक्रम हुआ। संस्था संस्कार भारती द्वारा आयोजित गोष्ठी का विषय टैगोर के जीवन के विविध आयाम था। हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शंभुनाथ ने गुरुदेव को विश्र्व कवि कहकर संबोधित किया। वह बोले-रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय अस्मिता को विश्र्वपटल पर विस्तारित किया। साहित्य एवं कला सेवाओं से उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नई जान फूंकी। source-dainik jagran 9/5/12

Wednesday, April 18, 2012

अनुदेशकों के 41307 पद स्वीकृत किए गए

अनुदेशकों के 41307 पद स्वीकृत किए गए
लखनऊ: शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 100 से अधिक नामांकन वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों में कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा व कार्य शिक्षा के लिए अंशकालिक अनुदेशकों के 41307 पद स्वीकृत किए गए हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने विभागीय अधिकारियों को इन पदों को भरने के लिए शीघ्र ही नीति निर्धारित करने का निर्देश दिया है। मंत्री ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर वंचित और निर्धन वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिलाया जाना है। इस पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार करेगी। इस मकसद से वंचित और दुर्बल वर्ग को राज्य सरकार द्वारा परिभाषित किया जाएगा ताकि नए सत्र में गरीब बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
news -dainik jagran 18/4/12

Monday, April 16, 2012

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने राजकीय डिग्री कॉलेजों में 29 विषयों के प्रवक्ता के 267 पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने राजकीय डिग्री कॉलेजों में 29 विषयों के प्रवक्ता के 267 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्रवक्ता और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर (प्रवक्ता पद का परिवर्तित नाम) की नियुक्ति में दोहरे मानक अपनाए जा रहे हैं।


राजकीय कॉलेजों में डीफिल और एमफिल करने वालों को राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) और राज्य पात्रता परीक्षा (स्लेट) से छूट देने की बात कही गई है जबकि इविवि में यूजीसी रेगुलेशन 2009 के मुताबिक पीएचडी डिग्री पाने वालों को ही नेट और स्लेट से छूट देने का प्रावधान किया गया है। इससे इविवि की भर्ती में दिसंबर 2009 के पूर्व के पीएचडीधारकों को नेट और स्लेट से छूट मिलना मुश्किल हो गया है क्योंकि इसके पूर्व के ज्यादातर पीएचडीधारकों की डिग्री यूजीसी रेगुलेशन के मुताबिक नहीं है। लोक सेवा आयोग की ओर से राजकीय डिग्री कॉलेजों में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में साफ कहा गया है कि डीफिल और एमफिल करने वालों के लिए नेट और स्लेट की अनिवार्यता नहीं होगी। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शैक्षिक अर्हता सहित अन्य मानक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ही तय करता है। बहरहाल, राजकीय कॉलेजों में नियुक्ति के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2009 के मुताबिक डीफिल और एमफिल की अनिवार्यता न किए जाने से प्रतियोगियों ने राहत की सांस ली है। ऑनलाइन आवेदन 10 मई तक स्वीकार किए जाएंगे।